Ashtavakra Gita In Hindi — By Nandlal Dashora Pdf 112

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दाशोरा जी अपनी हिन्दी टीका में कहते हैं कि यह श्लोक साक्षात् मोक्ष का द्वार है। जब तक संकल्प हैं, तब तक जन्म-मरण हैं। ज्ञानी संकल्पों के जाल को पार कर जाता है। वह कृतकृत्य हो जाता है – उसके लिए करना या न करना, देना या लेना – सब समान। ashtavakra gita in hindi by nandlal dashora pdf 112


साधारण मनुष्य लगातार संकल्प-विकल्प में उलझा रहता है – "ऐसा करूँ, वैसा करूँ, यह पाऊँ, वह हटाऊँ"। ज्ञानी कोई संकल्प नहीं करता, क्योंकि उसकी स्थिति निःसंकल्प है। वह घटनाओं को होने देता है, बिना उनमें उलझे। Just downloading the 112-page PDF is not enough;