Ziyarat E Nahiya In Hindi -

मूल रूप से अरबी में, लेकिन फ़ारसी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेज़ी में इसके अनुवाद और शरह (व्याख्या) उपलब्ध हैं ताकि साधारण लोग इसके गहरे अर्थों को समझ सकें।

यह ज़ियारत पहली बार प्रसिद्ध शिया विद्वान, सैय्यद इब्ने ताऊस (र.अ.) की किताब "इक़बालुल आमाल" में मौजूद है। इसके बाद, शेख अब्बास अल-कुम्मी (र.अ.) ने इसे अपनी मशहूर किताब "मफातीहुल जिन्नान" (Mafatih ul Jinnan) में शामिल किया, तब से यह दुनियाभर के शियाओं में बहुत प्रचलित हो गई। ziyarat e nahiya in hindi

विश्वास के अनुसार, यह ज़ियारत इमाम मेहदी (अ.स.) ने उस समय पढ़ी थी जब वे अपने पितरों के साथ मोहब्बत का इज़हार कर रहे थे। हालाँकि यह ज़ियारत दूर से है (नाहिया का अर्थ होता है - किसी तरफ या दिशा), लेकिन इसमें आध्यात्मिक तौर पर इमाम हुसैन (अ.स.) की मज़ार पर हाज़िर होने का एहसास होता है। मूल रूप से अरबी में

यह ज़ियारत मुख्य रूप से इमाम महदी (अ.त.फ.श.) से रिवायत की गई है और इसे 'मफातीहुल जिनान' जैसी प्रसिद्ध दुआ और ज़ियारत की पुस्तकों में शामिल किया गया है। इसे अल-इक़बाल (सैय्यद इब्न ताऊस) और बिहारुल अनवर (अल्लामा मजलिसी) जैसी प्राचीन शिया पुस्तकों में भी उल्लेखित किया गया है। ziyarat e nahiya in hindi

| उद्देश्य | विवरण | | :--- | :--- | | अज़ादारी का सबसे ऊंचा मुकाम | यह ज़ियारत सिर्फ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि रोने और समझने के लिए है। | | इमाम (अ.स.) से जुड़ाव | इसे पढ़ने वाला व्यक्ति सीधे इमाम हुसैन (अ.स.) से मुखातिब होता है। | | कर्बला का मानचित्र | यह ज़ियारत कर्बला की पूरी दास्तान को कुछ ही पन्नों में समेटे हुए है। | | जियादा का बदला | इसमें यज़ीद और उसके लश्कर पर खुली लानत (फिटकार) है। |